अनमोल वचन

अनमोल वचन

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वाचालता अर्थात अनावश्यक, बिना प्रसंग, अनर्गल बोलना और बहुत अधिक बोलना। जो बहुत अधिक बोलते हैं, वे तीन प्रकार के खतरे मोल लेते हैं। बे-सिर-पैर की बाते कर बैठते हैं, क्योंकि उन्हें तो बोलते रहना है। दूसरा बोलते समय वे यह भूल जाते हैं कि उन्होंने कहा क्या, किसके सामने कैसा बोलना चाहिए, यह उन्हें ध्यान नहीं रहता। इस कारण उन्हें कई बार लज्जित भी होना पडता है। तीसरा यह कि बोलने के जोश में कई बार गोपनीय रहस्य वाली बात अचानक उगल देते हैं, जिससे परेशानी खडी हो जाती है, इसलिए बहुत जरूरी है कि आप जब भी बोलें, सोच समझकर नपा-तुला बोलें। अनावश्यक और बिना प्रसंग के कोई बात मुख से निकालना कई बार अवमानना करा देता है। कई बार अधिक बोलने वाले व्यक्ति के मुख से ऐसी बातें निकल जाती हैं, जो दूसरों को चुभने वाली होती हैं। सम्भव है सामने वाला व्यक्ति किसी स्वार्थवश अथवा परिस्थितिजन्य मजबूरी के कारण कोई उसका उत्तर न दे पाये, परन्तु आपने उसे अपना शत्रु तो बना ही लिया है, जो अवसर मिलते ही बदला अवश्य लेगा, इसलिए नपा-तुला बोलें, अनावश्यक, अनर्गल, अप्रासांगिक बातें मुख से बिल्कुल न निकालें।

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