अनमोल वचन

अनमोल वचन

Anmol Vachanजिस जीवन में हा्रस, उल्लास, तथा उत्साह की मात्रा जितनी अधिक होगी, वह उतना ही सुन्दर होगा। प्रसन्नता ही जीवन की सुन्दरता का दूसरा नाम है। जिस जीवन में हा्रस नहीं, उल्लास नहीं, उत्साह नहीं, उसमें सारे संसार के सुख साधन क्यों न हों, चाहे वह विपुल सोने से निर्मित किया गया हो, सुन्दर नहीं कहा जा सकता। ऊंची कोठी, सजे कमरे, सुन्दर वस्त्र, परिपूर्ण तिजोरियां और रंग रूप से भी रंगरेलियां भले ही किसी के जीवन को दूसरों के लिये आकर्षक ना दें, किन्तु ये उपादान उसके स्वयं के जीवन की सुन्दरता का सृजन नहीं कर सकते। जीवन की सुन्दरता बाहरी वैभव में नहीं, मनुष्य के आंतरिक संसार में हुआ करती है, जिसके गुण, कर्म, स्वाभाव जितने सात्विक और सुरूचिपूर्ण होंगे, उसका जीवन उतना ही प्रसन्न, उतना ही सुन्दर होगा। जो कुविचारी, व्याभिचारी तथा अवगुणी है, वह कितना भी धनवान, शान शौकत से रहने वाला, सुन्दर शरीर का स्वामी क्यों न हो, सुन्दर जीवन की परिधि में नहीं जा सकता। इसके विपरित जो साधारण स्थिति वाला, गरीब है, सुन्दर शरीर वाला भी नहीं है, यदि वह शिष्ट, सभ्य, सुशील, संतुष्ट और शांत है, वह अधिक सुन्दर जीवन कहा जायेगा।

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