अनमोल वचन

अनमोल वचन

Anmol Vachanपहले जमाने में लोग बहुत अधिक वैभवशाली तो नहीं थे, परन्तु हृदय से बहुत सम्पन्न हुआ करते थे। उनके अन्र्तजगत में भावों की श्रेष्ठता कूट-कूटकर भरी थी। सादा जीवन और उच्च विचार उनका मूल मंत्र होता था। जिस प्रकार समय परिवर्तनशील है, उसी प्रकार देशकाल के अनुसार विचार में परिवर्तन आता रहता है। परिवर्तन आया। काल की गति के अनुसार विचारों का अवमूल्यन शुरू हुआ, जिसके कारण व्यक्तियों के हृदयों में उनके विचारों में शुष्कता आने लगी। लोग विचारों की उच्चता को छोडकर मात्र भौतिक जगत की सम्पन्नता को श्रेष्ठ मानकर उसकी ओर आकर्षित होते चले गये। बाहरी चमक-दमक में भावों की शुद्धता कुम्लहाने लगी। स्वयं को भौतिक रूप से संवारने की तथा बाहृय जगत को ही सब कुछ समझने की इस दौड में लोग शामिल होते गये। प्रेम, सहिष्णुता, दया, परोपकार के स्थान पर बाहृय जगत की सम्पन्नता हावी होती चली गई। लगभग सभी इस रोग से ग्रस्त होते चले गये। इस दौड के कारण भीतर झांकना बंद हो गया। इसका दुष्परिणाम भी सामने आने लगा है। अब तो लोग जीवन की अमूल्यता को ही नहीं समझ पा रहे हैं और अपनी जीवन लीला को ही समाप्त करने में लग गये हैं। सही है कि जीवन जीने के लिये भौतिक साधनों की आवश्यकता है, पर भावों की शुद्धता और पवित्रता से मन को सींचते रहना भी आवश्यक है।

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