अनमोल वचन

अनमोल वचन

Anmol Vachanभूल किसी के द्वारा भी सम्भव है। भले और समझदार लोग भी भूल कर बैठते हैं शास्त्र में दो प्रकार आज्ञा है अमुक कार्य करो, अमुक कार्य न करो। उदाहरण के लिए (1) किसी से घृणा मत करो (2) सबसे प्रेम करो। इनमें से एक करना, दूसरा न करना भी अंशत: भूल है। यह संसार ईश्वर का है और अचरज यह है कि ईश्वर के संसार से प्रेम करने में लोग इतने आसक्त और लिप्त हो जाते हैं कि ईश्वर को भूल जाते हैं, अपने आपको भूल जाते हैं। जिस प्रकार माता-पिता बच्चों को सुखी और सम्पन्न देखना चाहते हैं परमपिता परमात्मा भी नहीं चाहता कि हम गरीब, मोहताज और दुखी हों वह चाहता है कि हमारे पास सभी प्रकार के वैभव हो, किन्तु उसको हम दिव्य भाव से भोगे, इस भाव से भोगे कि यह वैभव हमें परमात्मा का दिया है वह प्रभु से प्राप्त प्रसाद है। जो इस वैभव को प्रसाद रूप आध्यात्मिक तत्व मानकर भोगता है उसे फिर सब कुछ मिल जाता है। परमात्मा ने जो वैभव संसार में बिखेर रखा है वह हमारे सदुपयोग के लिए है। इसलिए नहीं कि हम उसमें आसक्त हो जाये और उसे और अधिक पाने के लिए पाप पुण्य का भेद समाप्त कर दें।

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