अनमोल वचन

अनमोल वचन

Anmol Vachanप्रात: सूर्योदय होते ही जीवन का एक नया दिन आरम्भ हो जाता है, जो सूर्यास्त पर समाप्त हो जाता है। इस प्रकार एक दिन आयु से कम होता जाता है। जन्म लेते ही आयु क्षय का यह कार्यक्रम आरम्भ हो जाता है, किन्तु अनेक प्रकार के कार्य भार से बढे हुए विभिन्न क्रिया व्यापार में व्यस्त रहने के कारण इस बीतते समय का पता ही नहीं चलता। ऐसे अवसर प्राय: प्रतिदिन आते हैं, जब हम जीवों के जन्म-वृद्धावस्था, विपत्ति, रोग और मृत्यु के कारूणिक और विचार परक दृश्य देखते हैं, किन्तु कितना मदांध कामना ग्रस्त और अविवेकी है इस धरती का इन्सान कि वह सब कुछ देखते भी विवेक और विचार की दृष्टि से अंधा ही बना हुआ है। इस अभागे इंसान को क्या कहें जो आत्म स्वरूप को भूलकर अपने शरीर को सजाने में ही आनन्द ले रहा है। इस शरीर की नियति को जानते भी शारीरिक सुख की मृगतृष्णा में इस प्रकार पागल हो रहा है कि उसको अपने ही स्वरूप का ज्ञान नहीं है। शारीरिक सुखों को जुटाने में ही जीवन का अधिकांश भाग नष्ट कर देता है। जब तक यौवन है, शक्ति है, तब तब आंखे खुलती नहीं बाद में शरीर में शिथिलता आने पर यदि कुछ समझ आ भी जाये तो क्या लाभ। लाभ तब है जब समय रहते सद्गुणों का संचय करके इस योग्य बना जाये कि यात्रा संतोषपूर्वक पूरी करके लौटने में कोई बाधा शेष न रहे।

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