अनमोल वचन

अनमोल वचन

Anmol Vachanजीवन विपरीतताओं का संगम है। जहां एक छोर है जन्म का तो दूसरे छोर में मृत्यु है। प्रेम व घृणा, सुख व दुख, सफलता व असफलता, खाई व शिखर इन्हीं विरोधों का समुच्य है यह जीवन। विरोध, विपरीतताएं एवं द्वंद इन्हीं का जोड है जीवन। यही जीवन की गतिशीलता का आधार है। इस सच्चाई को हममे से कोई स्वीकार नहीं कर पाता, तभी तो हममें से हर कोई आकांक्षा करता है इनमें जो प्रिय है वह मिल जाये और जो अप्रिय है व समाप्त हो जाये, मिट जाये अर्थात हम सब चाहते हैं कि मीठा-मीठा गप, कडुवा-कडुवा थू जो असम्भव है। इस चाहत में विचित्रता यह है कि जो ऐसा चाहता है वह अपनी चाहत के कारण दुख में गिरता है, क्योंकि इन दो में से एक को बचाया नहीं जा सकता। यदि कोई चाहे कि शिखर बचे और खाईयां मिट जाये जो उसे पागल ही मानना पडेगा। शिखर और खाई तो साथ-साथ है। जब शिखर बनता है तो खाई भी बन जाती है। चाहने वाले तो यह भी चाहते हैं कि जवानी बची रहे और बुढापा न आये पर ऐसा सम्भव नहीं। यदि जवानी शिखर है तो बुढापा खाई। जिस दिन जवान हुए समझो बुढापा पास में ही है। सभी चाहते हैं सुन्दरता बचे कुरूपता मिट जाये, किन्तु लाख प्रयास करने पर भी एक दिन सुन्दरता को कुरूपता में बदलना ही है। जब जन्म लिया है तो मृत्यु भी एक दिन अवश्य आयेगी।

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