अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan logoबच्चे के निर्माण में सबसे बडा हाथ माता का होता है, क्योंकि उसी के रक्त, मांस से बच्चे का शरीर बनता है। नौ महनों पेट में रहकर तथा अपने शरीर का रस दूध पिलाकर उसका पोषण करती है। कई वर्ष का होने तक वह अधिकांश समय माता के सानिध्य में रहता है, उसी के साथ सोता है। माता के जैसे विचार और संस्कार होते हैं, बालक उसी सांचे में ढलते हैं। यद्यपि पिता के बिन्दू का भी थोडा महत्व है और बडे होने पर शिक्षक का तथा बाह्य परिस्थितियों का भी प्रभाव पडता है, परन्तु यह सब मिलकर भी इतना नहीं हो पाता जितना कि प्रभाव माता का पडता है। संसार जितने भी महापुरूष हुए उनके निर्माण में माता का बहुत बडा हाथ रहा है। माता यदि विदूषी संस्कारयुक्त और सम्भ्य शिक्षित परिवार से है तो वह अपनी सन्तान को भी सुसंस्कारित करेगी। संतान यदि उच्छरखल,उदंड, अशिष्ट, असभ्य तथा आचरण विहीन होगी तो समझिये कि माता अच्छे परिवेश में नहीं है। जो माता स्वयं संस्कारित नहीं वह बच्चों को क्या संस्कार दे पायेगी। इसलिए संतान को सुयोग्य और संस्कारित बनाना है तो माता को पहले सुयोग्य तथा संस्कारित होना जरूरी है।

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