अनमोल वचन

अनमोल वचन

Anmol Vachanश्रीमद् भागवत गीता में भगवान कृष्णा ने कहा कि ‘जो पुरूष विषयों का चिंतन करने वाला होता है, उसकी विषयों में आसक्ति हो जाती है। आसक्ति से उन विषयों की कामना उत्पन्न होती है, कामना में विघ्न पडने से क्रोध उत्पन्न होता है, क्रोध से मूढ भाव और मूढ भाव से स्मृति में भ्रम हो जाता है। स्मृति में भ्रम होने से बुद्धि अर्थात ज्ञान शक्ति का नाश हो जाता है बुद्धि का नाश होने से मनुष्य मनुष्यत्व से गिर जाता है।’ जिस प्रकार पानी के उबलने पर पानी भाप में बदल जाता है ठीक उसी प्रकार व्यक्ति की ऊर्जा भी क्रोध के समय सर्वाधिक मात्रा में व्यय होती है। क्रोध के समय व्यक्ति की मनस्थिति भी इसी प्रकार की हो जाती है कि वह ठीक प्रकार से कुछ सोच समझ नहीं पाता और असंतुलित व्यवहार करने लगता है। उसकी स्थिति कुछ क्षणों के लिए एक मनोरोगी की भांति हो जाती है। वह विवेकपूर्ण निर्णय ले लेने की स्थिति में रहता ही नहीं। व्यक्ति की यह मनोस्थिति ही उसे पतित होने में अहम भूमिका निभाती है, क्योंकि अधर्म, पाप, व्यभिचार आदि के कारणों में क्रोध का ही मुख्य हाथ होता है।

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