अनमोल वचन

अनमोल वचन

Anmol Vachanयह ज्ञान सभी को है कि क्रोध करने से हानि ही हानि है लाभ कोई नहीं, परन्तु क्रोध फिर भी करते हैं। अब प्रश्र उठता है कि क्रोध आता क्यों हैं। सामान्यत: क्रोध का मुख्य कारण मनोवांछित इच्छा की पूर्ति न होना है। इसके अतिरिक्त सम्मान को ठेस पहुंचने, अहंकार को चोट लगने से भी मनुष्य अपना संतुलन खो बैठता है और क्रोध करने लगता है। यदि क्रोध पर नियंत्रण पाना है तो हमें अपनी समझ को इतना परिपक्व कर लेना चाहिए कि वह क्रोध के आवेश में न आ सके। ऐसा मात्र आत्म नियंत्रण द्वारा ही सम्भव है। आत्म नियंत्रण वह साधन है, जिससे हम अपने परम शत्रुओं, काम, क्रोध, लोभ, मोह, भय और तृष्णा आदि पर विजय प्राप्त करते हैं, अहंकारी अधिक क्रोध करता है और भय भी उसके भीतर किसी न किसी रूप में मौजूद रहता है, परन्तु वह ऐसे प्रदर्शित करता है जैसे कोई भय न हो। वास्तव में वह स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ सिद्ध करना चाहता है, स्वयं को होनहार और समझदार मानता है, जबकि वास्तव में वह ऐसा होता नहीं। श्रेष्ठ व्यक्ति वही है, जिसने अपने भीतर के शत्रुओं पर विजय पा ली है विशेष रूप से क्रोध पर।

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