अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan logoक्रोध मनुष्य का परम शत्रु है। वह मनुष्य को चहुंओर से हानि पहुंचाता है। क्रोध करने पर हित अनहित में, शुभ अशुभ में, शान्ति अशान्ति में, अहिंसा हिंसा में, परमार्थ स्वार्थ में, विनम्रता अहंकार में, शक्ति विध्वंस में और भाईचारा टकराव में बदल जाता है। क्रोध एक विष है, जो मनुष्य के चिंतन और व्यक्तित्व को विषाक्तता में बदल देता है। क्रोध एक ऐसे विकार के रूप में है, जो कई प्रकार की बीमारियों को जन्म देता है। चिकित्सकों के अनुसार कैंसर, उच्च रक्तचाप, सिरदर्द और मानसिक रोगों का एक कारण क्रोध ही है। मनुष्य के जितने भी मनोविकार हैं उनमें क्रोध प्रमुख है, जिससे हर दशा में बचने की सलाह दी जाती है। क्रोध व्यक्ति को मानसिक रूप से विकलांग बना देता है। यह ऐसा मनोविकार है, जो बुद्धि विवेक और भावना सबको नष्ट कर देता है। क्रोध का पहला प्रहार विवेक पर, दूसरा प्रहार होश पर होता है। इसलिए कठिन कार्यों, संकट के समय और अपमान होने पर धैर्य धारण करने की सलाह दी जाती है। शारीरिक और मानसिक ऊर्जा का जितना क्षय काम और क्रोध से होता है उतना किसी दूसरे कारण से नहीं होता।

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