अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachanजिन परिस्थितियों में आप वर्तमान में रह रहे हैं, उसी में पुरूषार्थ करते रहें, ईमानदारी और निष्ठा से करते रहें, अनुकूल परिस्थितियों में संयोग ईश्वरीय प्रेरणा से स्वत: प्राप्त होते जाते हैं। उसके लिये कोई जोडतोड नहीं करनी पडती, बस शर्त यह है कि आप अपने कत्र्तव्यों को पूरा करने में पुरूषार्थ करते रहें, उन्नति के अवसर आपके जीवन में अवश्य आयेंगे, परन्तु कदाचित आपके प्रारब्ध इस प्रकार के नहीं हैं कि आप अधिक उन्नति कर सकें, तब तो आपको उन्हीं परिस्थितियों में संतोष करना पडेगा। परिस्थितियों से बहुत अधिक की कामना न करें, बेहतर के लिये उद्यम अवश्य करते रहें। प्राप्त परिस्थितियों में जो लोग रहने का अभ्यास बना लेते हैं, वे सदा ही सुख की अनुभूति करते हैं। सुख किसी पदार्थ अथवा परिस्थिति विशेष में नहीं हैं, वह एक मानसिक भाव है, जो प्रत्येक परिस्थिति में प्रसन्न रहने से किया जाता है। छोटी-छोटी बातों में दुखी रहने का अर्थ यही है कि आप परमात्मा के विधान की अवहेलना करना चाहते हैं। प्रसन्न रहने के लिये अपनी से दयनीय स्थिति के व्यक्तियों को देखिये। अपने से बहुत ऊंचे स्तर के व्यक्तियों से कभी तुलना करने का प्रयास न करें। आप अपनी पूर्ण क्षमताओं के अनुसार पुरूषार्थ करते रहेंगे तो अच्छे परिणाम भी मिल जायेंगे।

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