अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachanबसंत आता है, चला जाता है, पतझड आता है, चला जाता है। सुख आते हैं, चले जाते हैं, दुख आते हैं, वे भी चले जाते हैं। सुख और दुख का आना-जाना ठीक बसंत और पतझड के आने-जाने की तरह है। आना और जाना इस जगत का शाश्वत नियम है। जो इस नियम को जान लेता है, उसका जीवन क्रमशः बन्धनों से मुक्त होने लगता है। व्यापार में घाटे के कारण आत्महत्या के इरादे से नदी में कूदते प्रौढ व्यक्ति को आचार्य रामानुज ने बचाते हुए उसके अवसाद के बारे में पूछा कि वह ऐसा क्यों कर रहा है, तो उसने अपनी सारी कहानी विस्तार से बताई तो आचार्य ने कहा तो तुम यह स्वीकार करते हो कि पहले तुम सुखी थे, वह बोला ‘हां तब मेरा सौभाग्य का सूर्य पूरे प्रकाश के साथ चमक रहा था, अब सिवाय अंधियारे के मेरे जीवन में कुछ शेष नहीं।’ यह सुनकर रामानुज ने कहा दिन के बाद रात्रि और रात्रि के बाद दिन निश्चित आता है। जब दिन नहीं टिका तो रात्रि कैसे टिकेगी। परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है। जब अच्छे दिन नहीं रहे तो बुरे दिन भी नहीं रहेंगे। जो इस शाश्वत नियम को जान लेता है। उसका जीवन अडिग चट्टान की भांति हो जाता है। जो दुख और सुख दोनों को समभाव से लेता है, वह एक दिन स्वयं को जान लेता है, जो स्वयं को जान लेता है, वह ईश्वर को भी जान लेता है।

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