अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachanयाद रखो शरीर नश्वर है, परन्तु आत्मा अमर है। किसी भी मूल्य पर अपनी आत्मा का हनन मत होने दें, फिर तुम्हे सुख स्वत: ही मिलेगा। इस सच्चे सुख की प्राप्ति के लिये प्रत्येक समय सद्विचारों से सुसज्जित रहो, कभी भी इस दुनिया की चोटों के सामने सिर मत झुकाओ। अपने स्वाभिमान की रक्षा करते रहो। इस शरीर से अधिक मोह तो न करो, परन्तु इसके महत्व को ध्यान में रखकर इससे प्यार अवश्य करो, तभी तुम ईश्वरीय नियमों को प्यार कर सकोगे। अज्ञान के पर्दे को हटाकर महापुरूषों, सिद्धों से, ईश दूतों से और सत्य अहिंसा से अपना नाता जोड सकोगे। जीवन के प्रेमियों प्रतिपल जीवन का सदुपयोग कीजिये। जीवन के सदुपयोग का अर्थ सच्चे अर्थो में कर्म योगी बनना है, जैसे कि मर्यादा पुरूषोत्तम राम, योगीराज कृष्ण, प्रचंड योगी श्रीजनक प्रभुति महापुरूष थे। हम कर्मयोग की सीढियों पर अविचल, बिना विश्राम किये तब तक चलते रहें, जब तक कि स्वयं महायोगी न बन जायें।

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