अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan3प्रतिदिन समाचार पत्रों में नये-नये समाचार आया करते हैं पर अपने राम को इतनी फुरसत कहां कि उनसे कुछ शिक्षा लें और उन पर मनन करें, जिधर देखो उधर की हालत ही ऐसी हो रही है कि सुन-सुनकर जी उकता गया है। खबरें ऐसी-ऐसी कि उन्हें सुनना-सुनाना उनके उदाहरण देना भी नैतिकता से भ्रष्ट होना है। कलयुगीय घटनाओं को सुनते-पढते सिर लज्जा से झुक जाता है। सुनकर पढकर शरीर के रोम-रोम में बैचेनी फैलकर रोये खडे हो जाते हैं। कुछ उपाय करने, वातावरण को सुधारने में अपनी क्षमतानुसार सहयोग करने के स्थान पर हम मात्र यह कहकर ही इति श्री कर देते हैं कि कैसा जमाना आ गया है। इस कलियुग में हमें और क्या-क्या देखना पडेगा। वास्तव में जिस समय यह जीवन बीत रहा है, कुछ मनीषयों, सुधारकों और सच्चे संतों के लिए यह सौभाग्य का समय बन सकता है यदि वे इस कलियुग को सतयुग में परिवर्तित करने का बीडा उठायें और इस असभ्य समाज को सभ्य बनाने को ही अपने शेष जीवन का लक्ष्य बनाकर स्वयं को धन्य करें।

Share it
Top