अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan1धन्य हैं वह सर्वज्ञ प्रभु जिसने हमें मनुष्य बनाया। मनुष्य होने के नाते हम रोज उठते हैं, नहाते-धोते हैं और अपना-अपना पेट भरते हैं, कमाते और खाते हैं। बडी लम्बी-चौडी बातें करते हैं। हां में हां भी खूब मिलाते हैं। ऊपरी टीपटाप, अपना बडप्पन दिखाने को नाटक भी बहुत करते हैं। केवल इसलिए कि हमारी गिनती सभ्य लोगों में हो। मानसिक रूप से काफी जागृति के बावजूद मस्तिष्क अपनी सुस्ती दिखाता रहता है। नित्य प्रति क्षण-क्षण बिना सोचे-समझे जीवन की चक्की में पिसता चला आ रहा है। ऐसे समय में हम भी रोजमर्रा की टोकरी में दैनिक कामों के रूप का आटा लिए हवा में, धूल में मिलाते रहते हैं और फिर जैसे के तैसे भूखे बने रहते हैं। ऐसे भूखे अंतिम दम तक अपूर्ण, अतृप्त रह जाते हैं। अब आप और हम सभी ऐसे जीवन के बारे में कुछ सोचे-समझे और इस जीवन की समस्याओं, इसके रहस्य को हल करने का प्रयत्न करें।

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