अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachanदूसरों को अधिक सुखी और सम्पन्न देखकर ईष्र्या करना और भगवान को दोषी ठहराना मनुष्य की बहुत बडी भूल है। ऐसा वह इसलिए करता है कि उसे केवल अपने अधिकार प्रिय हैं। पूर्व जीवन में उसने क्या किया है कुछ संगत होनी चाहिए। किसी को कम किसी को अधिक देने का अन्याय भला परमात्मा क्यों करेगा। मनुष्य अपने ही कर्मों का लाभ या घाटा उठाता है। एक रूपया देकर क्या किसी को पांच रूपये मूल्य की वस्तु प्राप्त हुई है। योग्यता से अधिक दे देने की भूल परमात्मा भला क्यों करेगा। यदि ऐसा होने लगे तो परमात्मा को लोग न्यायकारी क्यों कहेंगे। अन्यायी कहना आरम्भ कर देंगे। उसका यही कुछ क्या कम उपकार है। जो उसने आपको मनुष्य जैसा अलभ्य और सर्वश्रेष्ठ अवसर प्रदान किया। आप चाहे तो अपने जीवन का मूल्य बढा सकते हैं और कर्तव्य पालन एवं अन्य सद्गुणों द्वारा आगे के लिए शुभ परिस्थितियां, अच्छे परिणाम और शुभ संयोग प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए पूर्व जन्मों के प्रारब्धवश इस जीवन में जो संयोग और परिस्थितियां उपलब्ध हैं उनमें ही संतोष रखते हुए अपने ‘आगे’ की उन्नति के लिए शुभ कर्मों को करते हुए प्रयासरत रहना चाहिए।

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