अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan1परमात्मा से मिले इस अमूल्य जीवन को नीरस नहीं उल्लासमय बनाये। जीवन उल्लासमय तभी होता है, जब सभी को साथ लेकर चला जाये। एकाकीपन नीरसता लाता है। संंसार में विविधता है और इस विविधता में ही पार पाना है। इसमें रमना नहीं, बल्कि नदी नाव संयोग के अनुरूप हिलमिलकर पार हो जाना है, क्योंकि समूह भाव से ही जीवन उत्सव बनता है। सभी परिजन अलग-अलग नहीं, मिलकर रहे। सबको साथ लेकर चलना, सबका आपस में सामंजस्य बैठाना ही अभीष्ठ है पर्वों को विशेष उत्साह से मनायें। सबके मंगल की कामना करें। पर्वों पर अडोस-पडोस एवं निकट के परिजनों का विशेष ध्यान रखें। कोई भूखा न रह जाये। केवल अपने लिए जीना तथा स्वउदर पूर्ति तक केन्द्रित रहना अच्छी बात नहीं। जीवन संस्कारमय तो तभी होगा जब समग्रता के साथ गुणों का संवर्धन होगा। इसलिए आत्मचेतना का सामाजिक विस्तार निरन्तर बना रहना चाहिए। जब ईश्वर ने हम सेवा के योग्य बनाया है तो सेवा से सम्बन्धित विविध कार्यों का विस्तार होना चाहिए। सेवा हमारे मन की पावन भावना है, जो हमें राग द्वेष और भेदभाव से ऊपर उठाती है।

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