अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachan-logoहम परमात्मा को पाने के लिये मंदिरों, मस्जिदों, गुरूद्वारों और गिरजाघरों में जाते हैं, अपनी-अपनी आस्था के अनुसार तीर्थ यात्राएं करते हैं, सत्संग में जाते हैं, दान-यज्ञ करते हैं, किन्तु भगवान के दर्शन हो ही नहीं पाते। परमात्मा को पाने की पहली शर्त है स्वार्थ, घृणा, द्वेष और अहंकार को हम जीवन से सदा के लिये विदा कर सबसे प्रेम करना सीखें, दूसरों को क्षमा करना सीखें, तब हमें हर कण में भगवान के दर्शन होंगे, हर चेहरे में भगवान दिखाई देंगे। प्रभु बहुत दयावान हैं, वह हमारी अनेक त्रुटियों के लिये क्षमा करते हैं, बशर्तें कि दूसरों को क्षमा करने का गुण हममें भी हो। अनजाने में की गई त्रुटि तथा थोडी सी असावधानी के कारण हुई भूल को क्षमा करने में प्रभु उदारता दिखाते हैं। पुनरावृत्ति न करने के संकल्प के साथ की गई याचना स्वीकार कर लेते हैं, परन्तु पाप जो जान बूझकर किया जाता है, उसका फल हमें भुगतना ही होगा। अपनी दयालुता के कारण क्षमा मांगने पर प्रभु सद्बुद्धि का वरदान देते हैं, ताकि हम नेकी का रास्ता पकड लें और गुनाह का रास्ता छोड दें।
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