अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachanजीवन का जहाज आज उत्ताल तरंगों और तफानों से भरे संसार सागर में भटक गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसका नैतिक बोध, इसका दिशा सूचक यंत्र खराब हो चुका है। ह्रदय से मानवीय प्रेम अथवा करूणा का संवेदनशील स्वर, मस्तिष्क से नैतिक चिंतन की अवधारणा, संयम और सदाचरण का संकल्प, कहीं खो गया है। वास्तव में तो हम सब विचलित हो गये हैं अपना मार्ग भूल गये हैं। हिंसा तांडव मचा रही है, उन्मुक्त अट्टाहास कर रही है, आतंकवादी सारे संसार को भयभीत कर रहे हैं। सत्ता और सम्पत्ति के गलियारे में नैतिक आचरण ताक पर रख दिया गया है। व्यक्ति की अस्मिता एक अंधे मोड से गुजर रही है। हम भोगवादी हो गये हैं। ‘सबसे बडा रूपया’ जैसे सूत्र वाक्य जीवन का लक्ष्य बन गये हैं। ऐसे में धर्म, आध्यात्म और नैतिकता की चर्चा भी उपहास का कारण बन जाती है। लगता है कोई चमत्कार ही इस वातावरण को सुधार सकता है। भगवान से प्रार्थना है कि कोई राम आये, कृष्ण आये, महावीर, बुद्ध, नानक और दयानन्द आये जो इन भटकों को राह दिखाये।

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