अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan1तीन चीजें अनादि हैं ईश्वर, जीवात्मा और प्रकृति। जीवात्मा सत्य है जबकि परमेश्वर परम सत्य है। प्रकृति सत्य होते हुए भी परिवर्तनशील है, वैसे आत्मा भी मोक्ष तक अनेक शरीर बदलती है। प्रकृति के पंच महाभूतों आकाश, वायु, अग्रि, जल और पृथ्वी तत्वों से निर्मित मनुष्य के शरीर का संशलेषण मां के गर्भ में होता है। इन्हीं पांचों से निर्मित मनुष्य के शरीरों में सतत परिर्वन होता रहता है। वह बालक से किशोर, जवान फिर अधेड होते हुए वृद्ध हो जाता है। अंत में उसी शरीर का विलय पुन: पंच महाभूतों में हो जाता है। इसी प्रकार ऋतुओं में भी समयानुसार परिवर्तन होता रहता है। गर्मी बरसात में बरसात जाडे में और जाडा पुन: गर्मी में परिवर्तित हो जाता है। बीज वृक्ष बनता है, वृक्ष बडा होता है उसमें शाखाऐं फूटती हैं जिन पर फूल आता फिर फूल से फल निकलते हैं अंत में उसी वृक्ष से बीज बनता है। यही सृष्टिचक्र है। जो शरीर पहले नहीं था बीच में दृष्टिगोचर हुआ अंत में फिर नहीं रहता वही असत्य है किन्तु जिन महाभूतों से उसकी रचना हुई वे परिवर्तनशील तो हैं परन्तु नित्य है इसलिये प्रकृति को असत्य कहने की भूल मत करो।

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