अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan3संसार की सबसे श्रेष्ठ योनि ‘मनुष्य’ परमात्मा ने कृपा करके तुम्हे प्रदान की है। इस योनि का सदुपयोग कैसे हो इसके लिए विवेक भी प्रदान किया है। अब यह ईश्वर प्रदत्त तुम्हारे विवेक पर निर्भर है कि ईश्वर उस ‘श्रेष्ठतम’ को बचाये उसे और महत्वपूर्ण बनाये अथवा उसे मिटा दे। परमात्मा ने मनुष्यों को जीने, रहने, खाने, पीने, सोचने, विचारने हेतु रात-दिन के रूप में 24 घंटे का समय दिया है। अब उस समय में जिधर तन-मन का रूझान होगा, व्यक्तित्व के निर्माण का भवन आकार लेता जायेगा। इन 24 घन्टों में जो तप व त्याग करेगा वही जगत मेें प्रसिद्धि पायेगा। अपनी जय-जयकार करायेगा। जो भोग और सांसारिकता के योग में चितन और देह की ऊर्जा का अपव्यय करेगा, उसके चरित्र और व्यक्तित्व का स्तर नीचे जाता रहेगा। ईश्वर प्रदत्त इस मानव जन्म के दुलर्भ फल का उपयोग जो जिस निष्ठा और लगन से करेगा उसी के अनुरूप वह फल पाने का अधिकारी होगा, उसका सदुपयोग होगा तो वह आदर्श, मूल्य, मर्यादा के जैसे हरियाले वन महकायेगा, संसार का कल्याण होगा। दुरूपयोग होगा तो संसार में अशान्ति, हिंसा, अराजकता और विनाश का ताडंव होगा।

Share it
Top