अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan1स्मरण रक्खे मनुष्य का सुख उसके भीतर ही छिपा है। मनुष्य की शान्ति और उसका आनन्द उसके भीतर ही आवृत है, परन्तु मनुष्य इससे बेखबर है। वह सोचता है कि आनन्द पदार्थ में छिपा है। इसलिए वह पदार्थो को पाने के लिए उनकी खोज दूर तक करता है, परन्तु उसकी खोज को मंजिल प्राप्त नहीं हो पाती। वह भटकता रहता है, भटकता रहता है और भटकते- भटकते ही दम तोड देता है। उसकी कामनाएं कभी पूर्ण हो ही नहीं पाती। इस सच को तो नकारा नहीं जा सकता कि पदार्थ से सुविधाएं पाई जा सकती हैं, परन्तु सुविधाएं ही सुख नहीं है, सुविधांए शरीर के तल तक ठहर जाती है, सुविधाएं आत्मा को तृप्ति नहीं दे सकती। इसलिए हम बहुधा बडे-बडे साधन सम्पन्न लोगों को भी बहुत दुखी पाते हैं। कोमल गद्दों पर भी उन्हें नींद नहीं आती। सुस्वादिष्ट व्यंजन भी उन्हें तृप्ति नहीं दे पाते। सच्चे सुख को साधने के लिए अपने भीतर लौटना होगा। अपनी आत्मा के भीतर ही उसे खोजना होगा। जो भीतर खोजते हैं, उन्हें अवश्य ही परमानन्द की प्राप्ति होती। परम आनन्द के मेघ उन पर अवश्य ही बरसते हैं।

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