अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan1शक्ति और सामथ्र्य का प्रयोग अहंकार तथा दंभ प्रदर्शन के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका नियोजन मानवता के कल्याण एवं विकास के लिए करना चाहिए। दुख, कष्ट एवं कठिनाईयों से घिरे इंसान को सहायता प्रदान करना सक्षम व्यक्तियों का कर्तव्य है। निर्बल, निरीह अबला, बालक एवं वृद्धों की सहायता सर्वोच्च धर्म है, इन्हें सताना सबसे बडा अधर्म किन्तु अहंकारी ऐसा न करके इन्हें सताने में ही अपनी सफलता मानते हैं। सामथ्र्य के साथ जब अहंकार जुडता है तो विनाश होता है और जब सामथ्र्य के साथ संवेदना जुडती है तो विकास होता है। ये तो पतित मानव के कार्य हैं जो केवल अहंकार के लिए सामथ्र्य का प्रदर्शन करते हैं उसका दुरूपयोग दुर्बलों को सताने में करते हैं। सामथ्र्य और शक्ति का प्रयोग तो समान व्यक्ति के विरूद्ध होना चाहिए वह भी मूल्यों की रक्षा के लिए, किन्तु होता है बहुधा इसके विपरीत। स्वयं से बलशाली और समान बल सामथ्र्य वालों से ऐसे अहंकारी बचकर निकलते हैं, जबकि दुर्बलों को सताने में अपनी शान समझते हैं। ऐसे मानवता के लिए अभिशप्त आसुरों का सामाजिक बहिष्कार अनिवार्य है।

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