अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachan-logoअपनी सारी विद्वता का प्रदर्शन त्याग कर केवल बुद्धू बने रहने का प्रयास कीजिए, यह कार्य है तो कठिन, क्योंकि जो वास्तव में ही बुद्धू है, वह भी इस यथार्थ को स्वीकारता नहीं, बल्कि वह स्वयं को बुद्धिमान तथा दूसरों को मूर्ख समझता है और जो ‘कुछ’ जानता है, उसके लिये और भी कठिन परन्तु असम्भव यह किसी के लिये भी नहीं। जिस दिन यह सम्भव हो जायेगा, उसी दिन आप बुद्धत्व को प्राप्त होने लगेंगे। यह सारी सृष्टि ईश्वरमय है, उसके कण-कण में ईश्वर व्याप्त है, जो निर्दोष भाव से केवल प्रभु भाव में खोकर इस संसार को देखता है, उसे प्रभु के दर्शन होने लगते हैं। प्रभु को जान लेना ही बुद्धत्व है, जितना कठिन विद्वता को पाना है, उससे कहीं अधिक कठिन उसे त्यागकर बुद्धू हो जाना है, क्योंकि अज्ञानी भी स्वयं को बुद्धू मानने को तैयार नहीं, फिर जो ‘कुछ’ जानता है, उसके लिये यह स्वीकारोक्ति बहुत ही कठिन है, परन्तु सत्य यह है कि बुद्धू हुए बिना परमात्मा के दर्शन नहीं होंगे और न ही बुद्धत्व की प्राप्ति होगी।
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