अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachanजीवन में सम्मान पाने के लिये वाणी का संयम बहुत आवश्यक है। जल्दबाजी में अनावश्यक बोलना घातक भी हो सकता है। कई बार क्रोध पर वश न होने से वाणी का संयम नहीं रह पाता, मारपीट हो जाती है, व्यर्थ की बक-बक से अनेक उलझनें खडी हो जाती हैं और उससे परिजनों तक को शर्मिन्दा होना पडता है। व्यर्थ की बकवास और वाणी के असंयम से व्यापार की हानि-लाभ, सांसारिक सम्मान और नये रिश्ते बनना प्रभावित होता है। अधिक वाचाल तथा वाणी के असंयमी को विश्वसनीय भी नहीं माना जाता। उसे गम्भीरता से भी कोई नहीं लेता, नौकरी पाने वाले नौजवान, इन्टरव्यू देते समय, बडों से बात करते समय सामाजिक व्यवहार में वाणी पर संयम रखने का अभ्यास करें। उस संयम से आपका व्यवहार और आपका व्यक्तित्व कहीं अधिक प्रभावशाली बन जायेगा। लाभ भले ही न्यून हो, परन्तु हानि की सम्भावनाएं तो होंगी ही नहीं, इसलिए स्वयं को विनम्र, शांत, शिष्ट बनाने के साथ मितभाषी अवश्य बनायें।

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