अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan1जागरूक युवा अपने भविष्य को संवारने के बारे में सोचता है, जो उसे सोचना भी चाहिए और उन्नति के लिये प्रयास भी करना चाहिए, जबकि वृद्ध व्यक्ति प्राय: पिछली घटनाओं को ही याद करते रहते हैं, क्योंकि वही उसकी संचित सम्पदा है। यद्यपि उनसे निरर्थक भावनाओं को उत्तेजित करने के अतिरिक्त और कोई लाभ नहीं मिलता। स्वप्नों को याद करते रहना निरर्थक है, उससे समय नष्ट होता है, इसलिए भूतकाल की घटनाओं का स्मरण करते रहना, उससे कोई प्रयोजन ही सिद्ध नहीं होता, केवल एक उपयोग तो है कि कोई प्रेरणादायी प्रसंग, अपने अनुभव अपने बच्चों, परिवार और समाज के युवाओं को बताये जायें। इस सीमा तक तो ठीक भी है और आवश्यक भी, अन्यथा तो जीवन संवारने हेतु लक्ष्य निर्धारित कर उस पर कार्य करने के अतिरिक्त मात्र भविष्य की कल्पनाओं में खो जाना और भूतकाल की घटनाओं को बार-बार याद करना निरूद्देश्य और निरर्थक है। अपने हाथ में केवल वर्तमान है, इसी का श्रेष्ठतम सदुपयोग करना बुद्धिमानी है। खाली मस्तिष्क रहते भूत या भविष्य की कल्पनाएं करते रहने की अपेक्षा यही अच्छा है कि वर्तमान के श्रेष्ठतम उपयोग की बात सोची जाये। यदि उसका सही उपयोग होगा तो निश्चय ही प्रगति पथ पर निश्ंिचत हो बढा जा सकता है।

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