अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan1जीवन में मिलने वाली असफलताओं से व्यक्ति बहुत दुखी होता है, एक प्रकार से टूट सा जाता है। ऐसे समय यदि उचित मदद न मिले तो भ्रमित होना स्वाभाविक है। असफलता मिलने पर एक क्षण के लिये लगता है जैसे सब कुछ समाप्त हो गया, जितना भी श्रम किया गया, सब व्यर्थ गया। न जाने कितने विचार मन में आते हैं, जिनसे मन और दुखी हो जाता है। शायद ही कोई व्यक्ति हो, जिसे हर कार्य में सफलता ही मिलती रही है। असफलता का मुंह न देखना पडा हो। जब हम कुछ चाहते हैं तो उसकी तैयारी करते हैं, बहुत परिश्रम करने के बाद अपनी चाहत को कुछ आकार दे पाते हैं। परन्तु यह अनावश्यक नहीं कि चाहत हूबहू वैसे ही पूरी हो, जैसा कि हम चाहते हैं। उसमें फेरबदल भी हो सकता है, न्यूनाधिक भी हो सकता है, असफलता भी मिल सकती है। हमें परेशानी तब होती है। जब कोई कार्य पूरी तरह हमारी मर्जी के अनुरूप नहीं होता। हम कभी-कभी इतने निराश हो जाते हैं कि स्वयं को अभिशप्त मानने लगते हैं। हमें यह समझना चाहिए कि हम सर्वशक्तिमान नहीं हैं। हम केवल कार्य करने में स्वतंत्र हैं, परिणाम निश्चित करने वाली सत्ता कोई और ही है। प्राप्त परिणाम हमारी इच्छा अनुसार भी हो सकते हैं और नहीं भी, क्योंकि परिणाम पर हमारा कोई अधिकार ही नहीं है। इस सच्चाई को खुले दिल से स्वीकार कर लेने में ही भलाई है।

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