अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachanजिंदगी है तो भूले भी होंगी, गलतियां भी होंगी, परन्तु गलतियों को, भूलों को मन में बसा लेना इनका समाधान नहीं। उनका समाधान प्रायश्चित है। ऐसा करने से मन पश्चाताप की ग्रंथियों से मुक्त होता है। प्रायश्चित का भाव तब आयेगा जब विवेक जागेगा, विवेक तब जागेगा जब मानसिक आवेगों का तूफान थमेगा, चित्त में स्थिरता आयेगी। हम महसूस करेंगे कि ऐसा हो गया है जो हमें नहीं करना था। हमें अपनी गलतियों का अहसास हो जाता है। प्रायश्चित ऐसा कर्म है, जिससे मन में बदलाव आ जाता है। हम अपनी गलतियों के लिए खेद अनुभव करते हैं। यह स्वीकार करते हैं कि हमें ऐसा नहीं करना चाहिए था। प्रायश्चित करने से हममें प्रेम एवं स्नेह के भाव पैदा होते हैं और हम सांसारिक वस्तुओं को छोडकर सबके व्यापक हितों की ओर मुडने लगते हैं। प्रायश्चित कमजोरी का नहीं साहस का प्रतीक है। यह गलतियों के आगे हथियार डालने का नहीं, बल्कि उन पर विजय प्राप्त करने का मार्ग है।

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