अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachanसंसार में ऐसे लोग अधिक हैं, जो गल्तियां हो जाने पर इन्हें छिपाते हैं। स्वयं को सही सिद्ध करने के लिये तरह-तरह के तर्क देते हैं। ‘मैं गलत हूं, यह स्वीकारने में व्यक्ति को शर्म महसूस होती है और यह विचार भी मन में होता है कि जब लोगों को उसकी गल्तियों का पता चलेगा तो वे हंसेंगे, छींटाकशी करेंगे। यह सोचकर भी सार्वजनिक रूप से अपनी गलती को स्वीकार नहीं करना चाहता। गलती न स्वीकारने पर यह होता है कि आगे चलकर गल्तियों के रूकने तथा न दोहराने की सम्भावनाएं ही समाप्त हो जाती हैं। हम अपने को सही मानते ही हैं, चाहते हैं कि दूसरे भी हमें सही समझें। ऐसा भी होता है कि अपनी गल्तियों को ही दूसरों पर डाल देते हैं। ऐसा करने पर गल्तियां सुधरती नहीं, बल्कि उससे अन्य समस्याएं पैदा हो जाती हैं। सुधारने का एक ही मार्ग है कि जैसे ही यह विवेक जागे कि हम गल्तियंा कर रहे हैं, कुछ ऐसा कर रहे हैं, जिसका दुष्प्रभाव हमारे साथ दूसरों की भी हानि करेगा, उन्हें भी कष्ट पहुंचायेगा तो वह समय प्रायश्चित का होता है, प्रायश्चित करने का तात्पर्य यह है कि हम अपनी त्रुटियों को स्वीकारते हैं, प्रभु से क्षमा याचना करते हैं और भविष्य में न दोहराने का संकल्प करते हैं। प्रायश्चित करने का लाभ यह होगा कि हमारी पाप की भावना तथा अपराध बोध नष्ट हो जायेगा।

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