अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan1दुनिया में कदाचित ही कोई व्यक्ति ऐसा मिलेगा, जिसने अपने जीवन में भूलें न की हों। भूलें कई प्रकार से होती हैं, जैसे अशिष्टता, उत्तेजना, विक्षोभ, क्रोध, उन्माद, गलतफहमी आदि। इन छोटी-छोटी भूलों के कारण कई बार हमसे बहुत बडी गलती भी हो जाती है, जिसका खामियाजा हमें बाद में भुगतना पडता है। प्राय: आवेश तथा उत्तेजना में हमसे भूलें हो जाती हैं, क्योंकि इनके आवेग में मन अस्थिर और अशांत हो जाता है तथा बुद्धि ठीक प्रकार से निर्णय नहीं ले पाती और हम कोई गलत कदम उठा लेते हैं। मनुष्य कभी प्रमाद, कभी आलस्य, कभी उत्तेजना, कभी भावनाओं के आवेग में, कभी प्रलोभनवश भी कहीं न कहीं भूल कर बैठता है। भूल होना स्वाभाविक है, परन्तु भूल का आभास होने पर यह ध्यान रखना चाहिए कि वह भूल दोहराई न जाये। भूल की पुनरावृत्ति करना ही मनुष्य की सबसे बडी एवं भयंकर भूल है। वह अक्षम्य भी नहीं होती। भूल हो जाना पाप नहीं, परन्तु यह जानते कि हम वह कर रहे हैं, जो गलत है, हमें नहीं करना चाहिए, वह पाप है।

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