अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachanबहुत अधिक धन किसी के पास हो जाये तो वह धन उसकी  उदारता को नष्ट कर देता है। इन धनियों को अपने चारों ओर दीन-दुखियों के, रोग पीडितों के, अभावग्रस्तों के दर्शन होते हैं, परन्तु उनका हृदय उन्हें देखकर भी करूणा से नहीं भरता। वे अपने सुख को इन दुखियों में नहीं बांटते। ये अपनी अयोग्य सन्तानों के लिये तो धन संग्रह करते रहेंगे, परन्तु जो पात्र है, जिन्हें वास्तव में जरूरत है, उन्हें नहीं देंगे। आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन तथा उपयोग प्राणियों के लिये और प्राणियों की सेवा में करना ही न्याययुक्त है। इस जगत में आपका कुछ भी नहीं, सब कुछ ईश्वर का है, ईश्वर का दिया है। ईश्वर द्वारा दी गई कृपा को हम अपनी तथा अपने परिश्रम द्वारा प्राप्त मान लेते हैं। इसी भूल के कारण हम अनेक पाप भी कर बैठते हैं। इसलिए परिश्रम से, नेक नीयति से, ईमानदारी से चाहे जितना कमाओ, परन्तु उसका केवल संग्रह ही न करो। अपने उपयोग के साथ दीन-दुखियों की सहायता में भी लगाते रहो। अधिक धन संग्रह हो जाने पर व्यक्ति धन के मद में बौरा जाता है, अपने पुराने दिनों को भूल जाता है। अहंकारी होकर दूसरों को हीन, नीच तथा छोटा मान उनके तिरस्कार का पाप करने लगता है। प्रभु उनकी बुद्धि को सद्बुद्धि बनाये रखें, ताकि ये पाप से बचे रहें।
add-royal-copy

Share it
Top