अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan1इस संसार में सभी प्राणियों में सामथ्र्य है। सामथ्र्य से विहीन कोई भी नहीं। यह बात अलग है कि किसी की सामथ्र्य कम और किसी की सामथ्र्य अधिक। चीटी की अपनी सामथ्र्य है और हाथी की अपनी। मानव की अपनी सामथ्र्य है तो दानव की अपनी। सभी को अपनी सामथ्र्य पर अभिमान है। इस अभिमान से न चींटी वंचित है, न हाथी, न मानव, न दानव और न देव-देवी। स्वयं को नगण्य कोई नहीं समझता, यद्यपि प्रकृति की हिलोरे उन्हें उनकी नगण्यता का अहसास कराती रहती हैं। परमेश्वर की सामथ्र्य के सम्मुख सभी नगण्य हैं, क्योंकि अकेला वही है, जिसकी सामथ्र्य अनन्त है। उन्हीं की सामथ्र्य का थोडा सा अंश पाकर सभी समर्थ हुए हैं। प्रभु से जुडकर उसमें स्वयं को अर्पित कर सृष्टि का प्रत्येक जीव अपनी स्वयं की नगण्यता समाप्त कर प्रभु की अनंता को भी प्राप्त कर सकता है। पानी का बुलबुला जब तक अपनी आभासी सीमाओं से घिरा रहता है, तब तक वह असीम सागर की विशाल जलराशि की व्यापकता अनुभव नहीं कर पाता, परन्तु अपनी क्षुद्रता गंवाते ही वह यह अनुभूति पा लेता है

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