अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan1परमात्मा को पाने के लिये कुछ लोग वनों, पहाडों अथवा कन्दराओं जैसे एकान्त स्थानों पर जाकर निवास करते हैं, साधना करते हैं, अभ्यास करते हैं, किन्तु जो परिवार में ठीक से रह लेता है, उसे कहीं ओर जाने की आवश्यकता नहीं होती। वह परिवार में रहकर भी प्रभु का साक्षात्कार कर सकता है। परिवार तो वास्तव में परमात्मा से मिलने का प्रशिक्षण केन्द्र है। यदि हम परिवार में प्रेमी बनकर रहें, मोही बनकर नहीं तो हमें प्रभु प्राप्ति के दिव्य चिन्मय, अलौकिक आनन्द की अनुभूति हो जाये। यदि हमें परिवार, समाज और संसार में रहना आ जाये तो मानव मात्र में ही नहीं, बल्कि प्राणी मात्र में हमें प्रभु के दर्शन होंगे। शारीरिक रोग और मृत्यु का भय हमें सतायेगा नहीं। हम सुख-दुख, जन्म-मरण, लाभ-हानि, मान-अपमान, राग-द्वेष के बन्धन से मुक्त होंगे। परिवार और समाज में सभी प्रकार के संघर्षों का अन्त होगा। परस्पर सेवा, त्याग और प्रेम की भावना फले फूलेगी। हमारा जीवन शान्ति, स्वाधीनता और प्रियता से ओतप्रोत हो जायेगा, किन्तु शर्त यही है कि हमें परिवार में रहने की कला आनी चाहिए। यदि हम मिले हुए शरीर और मिले हुए सामान से अपने निकटवर्ती जन और समाज की यथा शक्ति क्रियात्मक सेवा करे और बदले में कोई अपेक्षा न करे और न किये हुए का अभिमान करे।

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