अनमोल वचन

अनमोल वचन

संसार में जिन लोगों को मनोनुकूल उपलब्धियां हुई उन सबने जी तोड परिश्रम किया, पुरूषार्थ किया, किसी भी कार्य को करने में आलस्य नहीं दिखाया, कार्य छोटा हो या बडा उसे प्रतिष्ठा के साथ नहीं जोडा। आज का काम कल पर नहीं छोडा। अपनी क्षमताओं से अधिक ही कार्य किया। कभी अपनी क्षमताओं को सीमित करने का प्रयास नहीं किया। जो अपनी क्षमताओं से कम काम करता है वह आलसी अपनी शक्तियों को क्षीण कर लेता है। कोई भी व्यक्ति अपनी असीमित ऊर्जा को सीमा में बांधकर उसका सही उपयोग नहीं कर पाता, जो अपनी क्षमताओं को सीमित कर लेता है वह शनै-शनै अकर्मण्य हो जाता है, उसकी ऊर्जा भी क्षीण होती जाती है। केवल निकम्मा व्यक्ति ही आलसी नहीं, आलसी तो वह भी है, जो अपनी ऊर्जा का सही उपयोग नहीं करता, अपनी क्षमताओं से कम काम करता है। ऐसे व्यक्ति जीवन में प्राय: असफल ही रहते हैं। दरिद्रता उनके यहां डेरा डाल लेती है, दुर्भाग्य ही उनकी नियति बन जाती है। जिस व्यक्ति के भीतर उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम विराजमान है, उस व्यक्ति का भाग्य भी फलित होता है। दाहिने हाथ में यदि पुरूषार्थ है तो बायें हाथ में सफलता अवश्य आयेगी। पुरूषार्थ को देवी शक्तियों का सहारा भी आशीर्वाद के रूप में मिलता है।

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