अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan logoभगवान दो शब्दों की सन्धि से बना है भग तथा वान। भग का अर्थ होता है आयु, विद्या, बल, बुद्धि, ऐश्वर्य और शांति, वान का अर्थ है कि जिसके पास ये सारी शक्तियां, गुण और विशेषताएं हों, अर्थात उन सारी शक्तियों का स्वामी हो। इसी कारण हम इन शक्तियों की याचना भगवान से करते हैं। इन तत्वों की, इन शक्तियों की आवश्यकता हमारे जीवन में होती है। भगवान से याचना करते हम यही कहते हैं कि ये गुण जो आप में विद्यमान हैं, जिनके आप स्वामी हैं, ये मेरे भीतर भी आयें, मैं भी इनका स्वामी बनूं, किन्तु याचना करते रहने पर भी उनकी पूर्ति का जितना प्रयास हम करते हैं, रेत पर पानी की बूंद की तरह सब विलीन होता रहता है। इस कारण आयु, विद्या, बल, बुद्धि, ऐश्वर्य और शांति की पिपासा जीवन भर बनी रहती है। हमें क्यों ये शक्तियां पुन: पुन: याचना करने के पश्चात भी प्राप्त नहीं हो पाती। सदा निराशा ही हाथ लगती है। वह इस कारण कि इन शक्तियों को प्राप्त करने की पात्रता जो होनी चाहिए थी, वह हमारे भीतर नहीं है। पात्रता के लिये हमें आत्म विकास करना होगा, जिससे मन में पडी कामनाओं की गांठें जो कुंठाएं और जो अंधकार है, वह तमाम नष्ट हो जाये और प्रकाश की ओर हम गतिमान हों। ऐसा हो जायेगा तो वे सारे गुण और सारी शक्तियां हममें आ जायेंगी। पात्रता होगी तो बिना याचना के ही भगवान ये शक्तियां हमें प्रदान कर देंगे।

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