अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan logoकल करै सो आज कर, आज करै सो अब, पल में प्रलय होयेगी, फेरि करोगे कब। कवि आगाह कर रहा है कि कल जो करना चाह रहे हो, उस कार्य को आज कर लें और आज का कार्य अभी कर लें। थोडे समय के पश्चात ही प्रलय होने वाली है, फिर करने का अवसर कहां मिलेगा, किन्तु आलसी व्यक्तियों का सूत्र इसके विपरीत है, आज नहीं कल, इसी प्रकार वह जीवन में मिले बहुमूल्य समय को व्यर्थ में ही नष्ट करता रहता है। आलसी यह नहीं सोचता कि जंग लगाकर नष्ट होने की अपेक्षा श्रम करके, पुरूषार्थ करके घिस-घिसकर समाप्त होना श्रेयष्कर होता है। आज ही संकल्प लें कि जीवन जागृति का, जागरण का। जागरण से प्रयोजन भौतिक आंखें खोलकर रात भर गला फाडकर कीर्तन करना नहीं, बल्कि जागरण का सही अर्थ है अन्तसचेतना, अन्र्तचक्षुओं को खोलना है। वेद का ऋषि कहता है कि उठो, जागो और जो इस जीवन में प्राप्त करने आये हो, उस लक्ष्य के लिये जुट जाओ। अधिक सोने वाला तो आलसी है ही, परन्तु जो जागकर भी उठता नहीं, वह भी आलसी है। जो अविचल भाव से लक्ष्य के प्रति समर्पित होकर कार्य सिद्धि तक जुटा रहता है, वही व्यक्ति सही अर्थोंं में जागृत कहलायेगा। आलसी केवल वह नहीं, जो काम नहीं करता, बल्कि वह भी है जो क्षमता से कम काम करता है। जो अपने दायित्वों के प्रति ईमानदार नहीं, जिसमें कर्तव्य बोध नहीं, आलसी वह भी है।

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