अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan1आलस्य व्यक्ति का सबसे बडा शत्रु है, क्योंकि आलस्य के कारण व्यक्ति में जो गुण हैं वे भी क्षीण हो जाते हैं। सच तो यह है कि आलस्य का रोग जिस किसी को भी पकड लेता है तो वह फिर सम्भल नहीं पाता। आलस्य से देह और मन दोनों कमजोर पड जाते हैं। आलसी जीवन भर अपने लक्ष्य से दूर भटकता रहता है। कहा भी गया है कि आलसी को विद्या कहां, बिना विद्या वाले को धन कहां, बिना धन वाले के मित्र कहां और बिना मित्र के जीवन में रस कहां। आलस्य को प्रमाद भी कहा जाता है। कुछ काम नहीं करना ही प्रमाद नहीं, बल्कि अकरणीय अकर्तव्य अर्थात न करने योग्य काम को करना भी प्रमाद है। जो आलसी है वह कभी भी अपनी आत्म चेतना से जुडाव महसूस नहीं करता। कई बार व्यक्ति कुछ करने में समर्थ होता है फिर भी उस कार्य को टालने लगता है, फिर धीरे-धीरे कई अवसर उसके हाथ से निकल जाते हैं। तब पश्चात के अलावा कुछ नहीं बचता। इस लिए आलस्य त्याग कल वाला कार्य आज और आज का कार्य अभी करें। जो आज नहीं कल कहते हैं वे कल-कल करते रह जाते हैं फिर हाथ मलते ही रह जाते हैं।

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