अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachanवह केवल सत्य है जो सदैव एक रूप में स्थित रहता है। वह किसी भी काल, किसी भी युग में, किसी भी परिस्थिति में परिवर्तित नहीं होता। वह प्रकाशमान तत्व सदैव एक समान बना रहता है अर्थात जो अपरिवर्तनशील है वही सत्य है और वह अपरिवर्तनशील तत्व नित्य, शुद्ध परमात्मा है जो समस्त देह धारियों में आत्मा के रूप में विद्यमान रहता है। उसी परमात्मा ने सारे जगत को धारण कर रखा है और सारा जगत उसी के भीतर व्याप्त है। सभी शरीरों के भीतर रहते हुए भी कोई परमात्मा को जान नहीं पाता। उसी की सत्ता से सारे शरीर प्रकाशमान होते हैं उसी चेतन सत्ता के कारण मन बुद्धि इन्द्रियां क्रियाशील होती हैं। सभी देहधारियों में मानव देह ही मात्र साधन धाम कहलाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि समस्त शरीरों में चाहे वह मनुष्य का हो या फिर अन्य का सभी में आहार, निद्रा, भय, मैथुन आदि क्रियाएं एक समान होती है, परन्तु मनुष्य को एक विशेष गुण भी प्रदान किया है, जो किसी अन्य योनि में नहीं वह है विवेक। परमात्मा ने मनुष्य को विवेकशील प्राणी बनाया है, जो उस विवेक का प्रयोग कर सार असार का विभेद करता हुआ परमात्मा की शरण में जाता है तो वह ईश्वर की कृपा रूपी प्रसाद को प्राप्त कर उस परम सत्य का साक्षात कर लेता है।

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