अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachanआज मनुष्य जितना दुखी है उतना पहले कभी नहीं था। इसका एक ही कारण है आत्म विस्मरण। आज प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को छोडकर सब कुछ जनता है। दूसरों के विषय में इतना कुछ जानता है, जितना वह दूसरा स्वयं भी नहीं जानता। यही आदमी की अशांति का कारण है। जिस दिन मनुष्य स्वयं को जान लेगा, अपने होने का अर्थ समझ लेगा, उस दिन वह सुखी हो जायेगा। आखिर दुख का कारण भी तो यही है। जहां सुख मिलता है, वहां से हम पलायन कर जाते हैं। ठीक उसी प्रकार जैसे प्यास लगी हो और नदी कुएं के किनारे न जाकर मरूभूमि में जाकर पानी खोजे। सच्चाईयह है कि सुख बाहर नहीं मिलता, सुख तो भीतर नीहित है, परन्तु उसके लिए आपको अपने भटकाव को रोकना पडेगा। जब आप बाहर दौडना बंद कर देंगे तो भीतर की ओर स्वत: ही मुड जायेंगे। अन्दर पहुंचते ही परम सुख की प्राप्ति होगी। मनुष्य जो भी प्राप्त करना है वह केवल सुख प्राप्त करने के लिए करता है। वह व्यापार करे या नौकरी उससे अधिक से अधिक सुख प्राप्त करे, किन्तु वह सुख की खोज में गलत दिशा में दौड रहा है। उसे दृष्अि दोष है कि सुख, धन, सम्पत्ति तथा वस्तु संग्रह में है, परन्तु सच यह भी है कि आज तक इन चीजों से सुख किसी को प्राप्त नहीं हुआ।

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