अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan logoजिधर देखो उधर शिकायत। जनता को सरकार से शिकायत, अध्यापक को विद्यार्थी से, अभिभावक को अध्यापक से, बेटे को बाप से और बाप को बेटे से, बहन को भाई से और भाई को बहन से, पति को पत्नी से और पत्नी को पति से, सम्बन्धियों को कुटम्बियों से, एक को दूसरे से, दूसरे को तीसरे से। शिकायत की यहां कोई कमी नहीं। शिकायत करने वाले की सबसे बडी शिकायत है कि कोई उसे पूछता नहीं, प्यार नहीं करता, सम्मान नहीं देता और जब उसे प्यार, अपनापन, सम्मान देने की बारी आती है तो एकाएक जाने कितनी शर्तें थोप दी जाती हैं। शिकायत हटे तो कैसे हटे। शिकायत हटाने की शर्त है प्यार बांटो, सम्मान बिखेरो, अपनापन लुटाओ। यह परमात्मा की दी गई अनमोल धरोहर है, जिसे भगवान ने मुक्त हस्त से प्रदान किया है, इसलिए हम भी इसे खुले हाथ बांटें। देने पर शिकायत मर जाती है, लेने से तमाम शिकायतें पैदा हो जाती हैं। हम हर किसी पर अधिकार जताना छोडें, किसी पर अपनी मर्जी न थोपें। केवल सही दिशा देना, सही तरीके से व्यवहार करना, उनके कत्र्तव्यों के प्रति भी उत्तरदायित्वों के प्रति भी दायित्वबोध से अवगत कराना तो जरूरी है। शेष को दूसरों की इच्छा पर छोड दें। सभी प्रकार के कष्टों को सहते, सचिंतन, सद्भावना और सत्कर्म में संलग्न रहना यही है शर्त शिकायतों से मुक्ति पाने के राजमार्ग की। शिकायत फिर भी रहती है तो हर इच्छा।

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