अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachanघर हो, समाज हो अथवा देश हो हर क्षेत्र में जो चीज बहुतायत से मिलती है, वह है शिकायत। जिसे देखो शिकायत करता मिलेगा। सरकार चाहे देश की हो, प्रदेश की हो, नागरिकों को शिकायत रहती है कि सरकार ने यह नहीं किया, वह नहीं किया। पंचायत चाहे जनपद की हो, क्षेत्र की हो, नगर या ग्राम की हो, वे कार्य कितना भी अच्छा करें, शिकायत फिर भी बनी रहती है। हम शिकायत करते हैं कि मन मुताबिक काम नहीं हो रहा है, जो अपेक्षाएं हम कर रहे थे, वे पूरी होती दिखाई नहीं देती। मुखिया देश का हो या प्रदेश का, जनपद का हो या घर का, उसकी शिकायत भी यही हरती है कि जैसा वह चाहते हैं, वैसा हो नहीं रहा। आदेश की अवहेलना होती है, कोई अपना दायित्व पूरा करना चाहता ही नहीं। इस कारण काम पिछड जाते हैं। शिकायत प्रत्यक्ष अस्तित्व में होती नहीं, परन्तु जीवन में असन्तुलन अवश्य खडा कर देती हैं। कई बच्चों में देखा गया है कि उन्हें मां-बाप से शिकायत रहती है कि घर में मेरी उपेक्षा होती है, फलां को अधिक महत्व दिया जाता है। शिकायती प्रवृत्ति के व्यक्तियों के चरणों में त्रिलोक का वैभव भी रख दिया जाये तो भी उसमें कुछ न कुछ कमी निकाल देगा। जिनका स्वाभाव ही शिकायत करने का बन गया है, उनकी अधिक चिंता नहंी करनी चाहिए, क्योंकि जो लोग अधिक शिकायत करते हैं, वे अपने कत्र्तव्यों के प्रति नितांत उदासीन हुआ करते हैं। वे अभावों और कमियों की शिकायतें तो करते हैं, परन्तु कभी यह नहीं सोचते कि उनका अपने देश, समाज और परिवार के प्रति कोई कत्र्तव्य है, उनके प्रति वे कितने जागरूक हैं, उन्हें पूरा करने का कितना प्रयास करते हैं।

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