अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan logoव्यक्ति जब त्याग करता है तो उसे आनन्द और संतोष की अनुभूति होती है, परन्तु यदि वह दिन-रात भौतिक पदार्थों के संग्रह में ही लगा रहेगा तो उसे अशांति के अतिरिक्त कुछ प्राप्त होने वाला नहीं। समाज के बडे-बडे धनाढय धन को कई गुणा बढाने के चक्कर में लगे रहते हैं। वे दो रोटी चैन से भी नहीं खा पाते, रात को चैन की नींद नहीं सो सकते। नींद की दवाई खाते हैं, परन्तु एक भक्त जो भजन-सुमरन करके आनन्द की अनुभूति करता है वह आनन्द एक सेठ को छत्तीस प्रकार के भोजन करके भी प्राप्त नहीं होता। राजा ययाति के पास भौतिक वस्तुओं की कमी नहीं थी। सारा जीवन भोग विलास में बिताया। परमात्मा से और भोगों की कामना की वे भी प्राप्त हुए, किन्तु तृप्ति नहीं हुई। उसके सौभाग्य से प्रभु ने सत्प्रेरणा जगाई। ययाति में विवेक पैदा हुआ। भोगों की नि:सारता का अहसास हुआ। उसी विवेक ने उसे सन्यासी बना दिया। सभी को सन्यासी बनने की आवश्यकता नहीं। सन्यासी तो आप संसार में रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करते भी बन सकते हैं। केवल योग के साथ भोग करो त्याग के साथ ही संसार को भोगो।

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