अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol vachan logoजो शरीर युवावस्था में था वह वृद्धावस्था में नहीं रहता, मुख की आकृति बदल जाती है, शक्ति क्षीण हो जाती है। इन्द्रिय गोलक अस्त-व्यस्त हो जाते हैं, जिससे शरीर निर्बल हो जाता है, किन्तु बाल्यावस्था तथा युवावस्था में जो चेतन आत्मा शरीर में विद्यमान था वह ज्यौ का त्यौ है, वह नहीं बदला। वह जिस शरीर में स्थित है, वह उसकी बाल्य और तरूण अवस्था की राम कहानी याद कर दुखी अवश्य होता है कि कहां गई इस शरीर की वह शक्ति, कहां गया वह रूप, बालसखा कहां गये, वे दिन कहां गये, जब कुछ भी कर गुजरने को जीवन में उत्साह था। मैं मीलों तक जिन आंखों से देखता था, जिन कानों से धीमा शब्द भी श्रवण कर लेता था, जिन पैरों से छलांग मारकर दौडता था, जिन हाथों से मनो भार उठाता था, उन सबको आज क्या हो गया। आज मार्ग भी साफ नहीं दिखता, समीप के शब्द भी साफ सुनाई नहीं देते, पैरों से उठा बैठा भी नहीं जाता, हाथों से थोडा वजन भी उठाना मुश्किल है। आज मेरे शरीर की पुरानी शक्ति कहां गई। फिर एक दिन वह समय भी आयेगा, जब यह जीर्ण-शीर्ण शरीर भी नहीं रहेगा। यह भी समाप्त हो जायेगा, किन्तु मैं तो अमर हूं किसी और शरीर के साथ जो इस जन्म के आधार पर प्राप्त होगा पुन: जन्म लूंगा। अरे नौजवानों धोखे में मत रहना। इस जवानी ने मुझे धोखा दिया आप को भी देगी। इसलिए इस जवानी का सदुपयोग करते अच्छे कर्म करो ताकि अगला जन्म अच्छी योनि में हो।

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