अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachanजिन्होंने अपने ह्रदय में स्थित प्रभु से सम्बंध बना लिये, उसकी अनुभूति कर ली वे संसार में पूजनीय बन जाते हैं उनका रूतबा बुलंद हो जाता है। आपने एक बर्तन में गाय का घी रखा है, दूसरे बर्तन में पानी। दोनों ही तरल पदार्थ में से जिसमें मूल्यवान घी रखा है वह बर्तन भी मूल्यवान और महत्वपूर्ण हो जाता है, किन्तु यदि उसी बर्तन में कोई कूडा डाल दें तो फिर उसे बाहर आंगन में कोने के कूडे के स्थान पर रख दिया जायेगा। बर्तन तो एक ही हैं परन्तु उसके भीतर जो पदार्थ हैं उससे उसकी महत्ता कम या अधिक हो जाती है। इसी प्रकार बाहरी भांडा तो लगभग सभी का एक जैसा है, परन्तु महत्व भीतर स्थित विचारों का हैं। जिसने परमात्मा की अनुभति कर ली उसकी महत्ता बढ गई। यदि परमात्मा की ओर से मुंह मोड कर हमनें अपने भीतर संसार की तमाम विपरीत भावनाएं और लालसाएं बसयी हैं, तो फिर वास्तविकता में जीवन का कोई मूल्य नहीं रहता हैं। यदि लोक परलोक दोनों को संवारना है, तो आठो पहर, चलते फिरते, उठते बैठते, काम करते सदैव उसका ध्यान करना हैं, उसे भीतर महसूस करना हैं। उसे ही जीवन का आधार बनाना हैं, उसके निराकार होते भी अपने ह्रदय में उसकी साकार अनुभूति करनी हैं।

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