अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachan-logoहम जानते तो सभी हैं, कि नेक कार्यो को करने में ही कल्याण है, परन्तु लौकिक स्वार्थ हमें इस सच्चाई को भुलवा देते हैं, इसलिये समय-समय पर हमें सच्चे संतो का संग करना चाहिये। वे हमें स्मरण कराते रहते हैं कि परमपिता परमात्मा के चरणों में मन को निरंतर लगाकर रखोगे तो अपने कर्तव्यो के प्रति जागरूक रहोगे। हमें कोई ऐसा कार्य नहीं करना चाहिये, जो पापा की संज्ञा में आता हो। यदि उस सर्वशक्तिमान के चरणों में ध्यान रहेगा, तो संसार की कोई शक्ति नहीं, जो हमें पथ भ्रष्ट कर सकें। इसी कारण हमें संतों की शरण में बार-बार जाने की आवश्यकता होती है। संत एक सामान्य मनुष्य को महामानव भले ही न बना पाये, परन्तु वे उसे दानव बनने से तो रोक ही सकते हैं। भगवान राम जब त्रेता युग में आये तो उन्होंने मानव समाज को आत्मज्ञान का ही उपदेश दिया। द्वापर में भगवान कृष्ण आये, तो उन्होंने तत्व ज्ञान का उपदेश किया। कोई भी महाशक्ति आती है, तो वह संसार में जीवों को कल्याण मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। संत बताते आ रहे हैं कि लाखों योनियों में घूमते-घूमते यह दुर्लभ योनी प्राप्त हुई है। इस देह में भी हमने आत्मज्ञान को नहीं जाना, तो इस मानव चोले को पाकर भी जीवन व्यर्थ किया, जिसके कारण इस जन्म के पश्चात कितनी नीच योनियों में भ्रमण करना पड़ेगा।

Share it
Top