अनमोल वचन

अनमोल वचन

चिंता जहर है। चिंता तो केवल तन को जलाती है, किन्तु चिंता तो तन-मन दोनों को जलाती है। चिंता मत पालिये, चिन्तन कीजिए। समस्या का समाधान अवश्य मिलेगा। कुछ अच्छे मित्र बनाईये और अपने मन की सारी बातें उनसे कह डालिये। नहीं तो गुरू को ईश्वर को अपना सब कुछ मानकर उन्हें सब कुछ कहते रहिये, आंगन में लगे पेड-पौधों के सामने भी चिंता को उगला जा सकता है। जिस व्यक्ति के कारण चिंता है, उसे कह डालिये, जिससे चिंता की जड ही कट जाये। जो विवेकी हैं, वे चिंता नहीं करते। जिन दुखों के कारण चिंता व्याप्त होती है, उनके लिये विवेकी को उन दुखों का कोई अर्थ ही नहीं। वे दुख हो या सुख हो, उन्हें समान रूप से देखते हैं, मुस्कुराते हैं। उनके स्वास्थ्य पर इनका कोई अन्तर नहीं पडता। वे मान लेते हैं कि संसार में सब कुछ ठीक चल रहा है। परमात्मा की व्यवस्था के अनुसार चल रहा है। यदि कोई परिस्थिति हमारे अनुकूल नहीं चल रही है और हम चिंता में डूब जायें तो हमारी चिंता और हमारे दुख से संसार की गति में कोई अन्तर पडने वाला नहीं है, क्योंकि हमारी चिंताओं का कारण वह दुख हमें पीडा दे रहा है, हमारे ही किसी पूर्व जन्म के कर्मों का फल ही तो है।

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