अनमोल वचन

अनमोल वचन

anmol-vachanमनोवैज्ञानिकों का मत है कि बच्चों के आन्तरिक तथा बाहरी व्यक्तित्व को उनके साथ रहने वाले संगी साथी भली भांति निखारते तथा तराशते हैं। उनका सामाजिक, पारिवारिक वातावरण चाहे जैसा हो, परन्तु मित्रों का उनके व्यक्तित्व पर अधिक प्रभाव पडता है। जीवन के प्रति सोच, कार्यशैली, विचार, भावनाएं, पहनावा, खान-पान, स्वाभाव, चरित्र आदि यह सब वे अपने साथी मित्रों से ग्रहण करते हैं। मित्रों के सम्पर्क में आकर बच्चे पारिवारिक तनावों से मुक्त रहते हैं, वहीं उन्हें अपनी सोच पर मानसिक संतुष्टि मिलती है। इस प्रकार मित्रों एवं संगी साथियों की यह भूमिका बच्चों का जीवन बनाने, बिगाडने में बडी महत्वपूर्ण होती है। बच्चे अपनी हम उम्र के बच्चों के साथ खेलने में अधिक आनन्द पाते हैं, इसलिए वे घर से बाहर जाने की अधिक कोशिश करते हैं, परन्तु सही बात यह है कि बच्चे को घर से जैसे संस्कार मिले होते हैं, वह अपना उठना-बैठना उसी प्रकार के बच्चों के साथ पासंद करता है। वास्तव में मां-बाप ही बच्चे की नींव तैयार करते हैं। नींव जैसी होगी, इमारत भी उस पर वैसी ही बनेगी। इस प्रकार बच्चे को बनाने-बिगाडने में प्रथम भूमिका माता-पिता की ही है।
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