अनमोल वचन

अनमोल वचन

आज की दुनिया में आदमी अपने दुख से दुखी नहीं, दूसरों के सुख से दुखी है। वास्तव में आप दुखी नहीं हो, आपका अहंकार आपके दुख का कारण बन जाता है। आप अपनी दृष्टि में संसार से ऊंचे हो, दूसरों को अपने से ऊपर देखने की आप में कुव्वत है ही नहीं। आप यह क्यों नहीं सोचते कि सभी जिनमें मैं भी शामिल हूं, अपने-अपने प्रारब्ध के अनुसार ही पा रहे हैं। कल को प्रारब्ध किसको क्या दिन दिखा दे, किसे पता है। लोग दुख से मुक्त भी होना चाहते हैं और दोनों हाथों से दुख को पकडे हुए भी हैं। ठीक उसी बंदर की तरह, जो चना पाने के लिये सुराही में हाथ डालता है, चने मुट्ठी से पकडता है। मुट्ठी बांधे वह सुराही से हाथ निकालना चाहता है, ऐसा सम्भव हो नहीं पाता। यदि वह चना छोड दे तो हाथ निकल आयेगा। वही स्थिति आदमी की भी है। आप अहंकार को, ईष्र्या को, द्वेष को पकडे रहना भी चाहते हैं और इन दोषों के कारण उपजे दुख से मुक्ति भी चाहते हैं। पहले अहंकार छोडो, ईष्र्या, छोडो, द्वेष छोडो, सरल बन जाओ। आप साईकिल पर चढें हैं, जोर-जोर से पुकार रहे हैं कि कोई मेरी साईकिल रोके, किन्तु दूसरी ओर आप पेंडिल भी घुमाये जा रहे हैं। पहले पैंडिल मारना बंद करें, आपकी साईकिल स्वत: ही रूक जायेगी। आप दुखी हैं तो इसका कारण कोई दूसरा नहीं, आप स्वयं हैं।

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