अनमोल वचन

अनमोल वचन

हम सफल जीवन जी रहे हैं या असफल, सुखी हैं या दुखी, आगे बढ रहे हैं या पीछे जा रहे हैं। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि हमारा देखने का नजरिया क्या है। हम सफलता का मापदंड इस बात से तय करते हैं कि जीवन के प्रति क्या दृष्टिकोण अपनाया है। जिस दृष्टिकोण से जीवन का लक्ष्य बनाया है, उसे पाने में जीवन की अधिकांश ऊर्जा लगाते हैं, सुख या दुख भौतिक पदार्थों के संग्रह से नापा जायेगा तो किसी एक कार्य को करने में या कुछ उपलब्धियों को प्राप्त करने में एक व्यक्ति सुख की अनुभूति करता है, दूसरा उससे दुख की। यह व्यक्तिगत अनुभूति है। एक व्यक्ति जैसा लक्ष्य अपने लिये तय करेगा, वैसा ही उसका मापदंड होगा और उसी में सफलता-असफलता और सुख-दुख तय करेगा और सुख अथवा दुख का आभास करेगा। सच्चाई यह है कि वास्तविक सुख और सुखी जीवन वस्तु आधारित नहीं है, बल्कि सिद्धांत और मूल्य आधारित हैं। इस प्रकार सुख सबके लिये समान है। यदि हम सुख-दुख को मन की अनुभूति मान लें, जो सत्य भी है, तो हमारा सुख-दुख के प्रति दृष्टिकोण रचनात्मक हो जायेगा और हमारे बुद्धि, बल और पुरूषार्थ के अनुसार जो मिल रहा है, उसी में सुख और संतोष की अनुभूति हो जायेगी।

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