अनमोल वचन

अनमोल वचन

मनुष्य ही नहीं, प्रत्येक जीव मृत्यु से भय खाता है। मनुष्य के अतिरिक्त तो अन्य जीव अविवेकी और अज्ञानी होते हैं, परन्तु मनुष्य को भी अविद्या से उत्पन्न अज्ञान के कारण मृत्यु का भय घेर लेता है। सत्य का ज्ञान न होने के कारण वह स्वयं को मरने-जीने वाला मानता है। इस भ्रम से भय की उत्पत्ति होती है। आत्मा तो अमर है, वह न पैदा होती है, न मरती है। मात्र इस सत्य का ज्ञान ही मृत्यु के भय से छुटकारा दिला सकता है। इसके विपरीत यदि इस सत्य को अंगीकार न किया गया हो तो मृत्यु के भय से छुटकारा दिलाने वाला कोई नहीं मिलेगा। अपने सत्य स्वरूप को जानकर ही मनुष्य निर्भय हो सकता है। फिर उसे मृत्यु का भय कदापि नहीं सता सकता। जिस मनुष्य में मृत्यु का भय समाप्त हो गया, उसके अन्य भय तो स्वयंमेव विलुप्त हो जाते हैं। उसे ज्ञात हो जाता है कि यह बाह्य जगत तो माया का प्रपंचमय खेल है। जीने मरने वाला तो मात्र शरीर है, मैं आत्मा नहीं। मैं तो कभी न मरा, न पैदा हुआ। न ही आया, न कहीं गया। इस सत्य को साक्षात्कार करने के लिये ज्ञान का आश्रय लेना होगा।

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